ग्रेच्युटी कैलकुलेशन 2026: फ़ॉर्मूला, पात्रता और ₹20 लाख की टैक्स-फ़्री सीमा
अंतिम अपडेट: 13 अक्टूबर 2026
संक्षिप्त उत्तर: ग्रेच्युटी कैलकुलेशन का एक ही फ़ॉर्मूला है: आख़िरी मिला वेतन (बेसिक + DA यानी महंगाई भत्ता) × 15 ÷ 26 × सेवा के पूरे साल। परमानेंट कर्मचारियों को पांच साल चाहिए; 21 नवंबर 2025 से लागू लेबर कोड के तहत फ़िक्स्ड-टर्म कर्मचारी एक साल बाद ही पात्र हो जाते हैं। प्राइवेट सेक्टर की ग्रेच्युटी पूरे जीवन में ₹20 लाख तक टैक्स-फ़्री है; सरकारी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ़्री है।
अंतिम अपडेट: 13 अक्टूबर 2026 संक्षिप्त उत्तर: ग्रेच्युटी कैलकुलेशन का एक ही फ़ॉर्मूला है: आख़िरी मिला वेतन (बेसिक + DA यानी महंगाई भत्ता) × 15 ÷ 26 × सेवा के पूरे साल। परमानेंट कर्मचारियों को पांच साल चाहिए; 21 नवंबर 2025 से लागू लेबर कोड के तहत फ़िक्स्ड-टर्म कर्मचारी एक साल बाद ही पात्र हो जाते हैं। प्राइवेट सेक्टर की ग्रेच्युटी पूरे जीवन में ₹20 लाख तक टैक्स-फ़्री है; सरकारी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ़्री है। मुख्य बातें फ़ॉर्मूला: ₹1 लाख बेसिक + DA × 15/26 × 10 साल = लगभग ₹5.77 लाख। पात्रता: परमानेंट स्टाफ़ के लिए 5 साल, फ़िक्स्ड-टर्म स्टाफ़ के लिए 1 साल, मृत्यु या विकलांगता पर कोई न्यूनतम सेवा नहीं। वेतन की चौड़ी परिभाषा: कुल वेतन के 50% से ऊपर के भत्ते अब वेतन में वापस जोड़े जाते हैं, जिससे ग्रेच्युटी 40% या उससे ज़्यादा बढ़ सकती है। टैक्स: प्राइवेट कर्मचारियों के लिए ₹20 लाख की लाइफ़टाइम छूट, ओल्ड और न्यू दोनों रिजीम में। समय-सीमा: स्वीकार किया गया क्लेम नियोक्ता को आपकी अर्ज़ी के 30 दिन के अंदर चुकाना होगा। नौकरी छोड़ने पर किसी नौकरीपेशा व्यक्ति को मिलने वाला दूसरा सबसे बड़ा चेक अक्सर ग्रेच्युटी होती है, EPF (कर्मचारी भविष्य निधि) सेटलमेंट के बाद। फिर भी कई लोगों को नौकरी छोड़ते समय ही पता चलता है कि वे कुछ महीनों से पात्रता से चूक गए, या उनके वेतन ढांचे ने रकम छोटी रखी। 21 नवंबर 2025 को लागू हुए लेबर कोड ने ये दोनों बातें बदल दीं। यह गाइड उदाहरण वाली टेबल के साथ ग्रेच्युटी कैलकुलेशन का फ़ॉर्मूला समझाती है, नए Code on Social Security के तहत कौन पात्र है, 50% वेतन नियम आपके भुगतान को कैसे प्रभावित करता है, और Income-tax Act, 2025 के तहत ₹20 लाख की टैक्स-फ़्री सीमा कैसे काम करती है। ग्रेच्युटी कैलकुलेशन: ग्रेच्युटी क्या है और इसे कौन देता है? ग्रेच्युटी एक एकमुश्त लाभ है जो नियोक्ता किसी कर्मचारी को लंबी सेवा के बाद नौकरी छोड़ने पर, उस सेवा के इनाम के रूप में देता है। यह पूरी तरह नियोक्ता देता है; इसके लिए आपकी सैलरी से कुछ नहीं कटता, हालांकि कई कंपनियां इसे CTC (कॉस्ट टू कंपनी) का हिस्सा दिखाती हैं। नवंबर 2025 तक यह Payment of Gratuity Act, 1972 के तहत आती थी। वह कानून अब Code on Social Security, 2020 के Chapter V में शामिल हो गया है, जो दस या उससे ज़्यादा कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होता है। 8 मई 2026 को अधिसूचित Social Security (Central) Rules, 2026 ने 1972 के ग्रेच्युटी नियमों की जगह नए फ़ॉर्म और समय-सीमाएं लागू कीं। कई नियोक्ता इस देनदारी के लिए किसी जीवन बीमा कंपनी से ग्रुप ग्रेच्युटी पॉलिसी लेकर पैसा रखते हैं। अगर कंपनी मुश्किल में पड़ जाए तो इससे आपकी सुरक्षा होती है, लेकिन आपका हक़ कानून तय करता है, पॉलिसी नहीं। ग्रेच्युटी कैसे कैलकुलेट होती है? 15/26 का फ़ॉर्मूला ग्रेच्युटी कानून के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी कैलकुलेशन का फ़ॉर्मूला है: ग्रेच्युटी = आख़िरी मिला मासिक वेतन × 15 ÷ 26 × सेवा के पूरे साल वेतन: बेसिक पे और महंगाई भत्ता (DA), जिसे अब नीचे बताई गई चौड़ी परिभाषा के साथ पढ़ा जाता है। 15 ÷ 26: हर साल के लिए पंद्रह दिन का वेतन, एक महीने को 26 कामकाजी दिन मानकर। साल: पूरे साल, और आख़िरी अधूरा साल छह महीने से ज़्यादा हो तो उसे पूरा गिना जाता है। यानी 9 साल 7 महीने को 10 साल गिना जाता है। उदाहरण: पुणे की इंजीनियर प्रिया 9 साल 7 महीने बाद नौकरी छोड़ती है, उसका आख़िरी बेसिक + DA ₹60,000 है। उसकी ग्रेच्युटी ₹60,000 × 15 ÷ 26 × 10, यानी लगभग ₹3.46 लाख है। बेसिक + DA (₹/महीना) 5 साल 10 साल 15 साल 20 साल 25 साल ₹30,000 ₹0.87 लाख ₹1.73 लाख ₹2.60 लाख ₹3.46 लाख ₹4.33 लाख ₹50,000 ₹1.44 लाख ₹2.88 लाख ₹4.33 लाख ₹5.77 लाख ₹7.21 लाख ₹1,00,000 ₹2.88 लाख ₹5.77 लाख ₹8.65 लाख ₹11.54 लाख ₹14.42 लाख ₹1,50,000 ₹4.33 लाख ₹8.65 लाख ₹12.98 लाख ₹17.31 लाख ₹20 लाख (सीमा) ₹2,00,000 ₹5.77 लाख ₹11.54 लाख ₹17.31 लाख ₹20 लाख (सीमा) ₹20 लाख (सीमा) प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए कानूनी भुगतान ₹20 लाख पर सीमित है। ₹2 लाख बेसिक पर आप लगभग 17 साल बाद इस सीमा तक पहुंच जाते हैं; ₹1.5 लाख पर लगभग 23 साल बाद। नियोक्ता अपनी पॉलिसी के तहत ज़्यादा दे सकता है, लेकिन अतिरिक्त रकम पर टैक्स लगता है। अगर आपका नियोक्ता ग्रेच्युटी कानून के दायरे में नहीं है तो? कुछ छोटी कंपनियां इस कानून के दायरे से बाहर होती हैं। वे अपनी मर्ज़ी से जो ग्रेच्युटी देती हैं, उसका टैक्स के लिए हिसाब अलग तरह से होता है: हर पूरे साल के लिए आधे महीने का औसत वेतन, जो आख़िरी दस महीनों के आधार पर निकाला जाता है। 12 साल में ₹80,000 के औसत पर टैक्स-फ़्री रकम ₹4.8 लाख बनती है, जबकि 15/26 के फ़ॉर्मूले से ₹5.54 लाख। यहां अधूरे साल को पूरा नहीं गिना जाता। नए लेबर कोड के तहत ग्रेच्युटी के लिए कौन पात्र है? चार लेबर कोड 21 नवंबर 2025 को लागू हुए, जिन्होंने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों की जगह ली। ग्रेच्युटी के लिए अब तीन पात्रता नियम लागू हैं: परमानेंट कर्मचारी: इस्तीफ़े या रिटायरमेंट पर अब भी पांच साल की लगातार सेवा ज़रूरी है। फ़िक्स्ड-टर्म कर्मचारी: एक साल की सेवा के बाद अनुपात (pro rata) के हिसाब से ग्रेच्युटी मिलती है। श्रम सुधारों पर PIB की पृष्ठभूमि टिप्पणी इसे कॉन्ट्रैक्ट जैसी भूमिकाओं के लिए एक मुख्य फ़ायदे के रूप में बताती है। मृत्यु या विकलांगता: पांच साल की न्यूनतम सेवा की शर्त लागू नहीं होती। विकलांगता के कारण नौकरी खत्म होने पर भुगतान कर्मचारी को होता है; मृत्यु पर नॉमिनी या पात्र कानूनी वारिसों को। ₹50,000 बेसिक वाले फ़िक्स्ड-टर्म कर्मचारी को एक साल पूरा करने पर लगभग ₹28,846 मिलते हैं; दो साल पर ₹57,692। 2026 के नियमों पर एक कानूनी नोट के सारांश के अनुसार, Central Rules के तहत आख़िरी साल में छह महीने से ज़्यादा की सेवा फ़िक्स्ड-टर्म स्टाफ़ के लिए भी पूरे साल में गिनी जाती है। एक साल वाला नियम परमानेंट कर्मचारियों पर लागू नहीं होता, और कोड की घोषणा के समय इसी बात पर भ्रम हुआ था। अगर आप परमानेंट कॉन्ट्रैक्ट पर हैं, तो नौकरी बदलने की योजना पांच साल के निशान को ध्यान में रखकर बनाएं। चार साल दस महीने पर नौकरी छोड़ने से आपको कई लाख का नुकसान हो सकता है। क्या नोटिस पीरियड पांच साल में गिना जाता है? आम तौर पर हां। सेवा आपके आख़िरी कामकाजी दिन तक चलती है, इसलिए पूरा किया गया नोटिस पीरियड गिना जाता है। अगर आप रोल पर बने रहते हैं तो गार्डन लीव भी गिनी जाती है। अगर आप पांच साल के करीब हैं, तो इस्तीफ़ा देने से पहले ऑफ़र-लेटर की तारीख पर भरोसा करने के बजाय HR से अपना सही आख़िरी कामकाजी दिन पक्का कर लें। 50% वेतन नियम ग्रेच्युटी को कैसे बदलता है? नौकरीपेशा प्रोफ़ेशनल्स के लिए यह सबसे बड़ा बदलाव है। कोड ग्रेच्युटी, प्रोविडेंट फंड और बोनस, तीनों के लिए "वेतन" (wages) की एक ही परिभाषा इस्तेमाल करते हैं। बेसिक पे, DA और रिटेनिंग अलाउंस वेतन में गिने जाते हैं। HRA, कन्वेयंस, ओवरटाइम और कमीशन जैसी चीज़ें बाहर रखी जाती हैं, लेकिन सिर्फ़ कुल पारिश्रमिक के आधे तक। अगर बाहर रखे गए भत्ते कुल वेतन के 50% से ज़्यादा हैं, तो अतिरिक्त हिस्सा वेतन में वापस जोड़ दिया जाता है। कई भारतीय वेतन ढांचों में बेसिक सैलरी का 30–40% रखा जाता है, इसलिए यह मायने रखता है। ₹1 लाख मासिक वेतन, 10 साल पुराना तरीका लेबर-कोड वाला तरीका बेसिक + DA ₹35,000 ₹35,000 भत्ते (बाहर रखे गए) ₹65,000 ₹65,000, जिसमें से ₹15,000 50% सीमा से ऊपर ग्रेच्युटी के लिए वेतन ₹35,000 ₹50,000 ग्रेच्युटी ₹2,01,923 ₹2,88,462 बढ़ोतरी – लगभग 43% नियोक्ता इसके जवाब में सैलरी का ढांचा बदल रहे हैं, अक्सर बेसिक बढ़ाकर और भत्ते घटाकर। इससे ग्रेच्युटी और EPF बढ़ते हैं, लेकिन जहां प्रोविडेंट फंड पूरे बेसिक पर कटता है, वहां हाथ में आने वाली सैलरी घट सकती है। हमारी EPF कैलकुलेटर गाइड दिखाती है कि ऊंचा बेसिक आपके PF खाते में कैसे कंपाउंड होता है। दो सावधानियां। पहली, सलाहकार फ़र्म EY ने बताया कि कोड लागू होते समय कुछ सवाल, जैसे परफ़ॉर्मेंस बोनस को कैसे गिना जाए, अभी खुले थे; कोड पर उसका अलर्ट देखें। दूसरी, नवंबर 2025 से पहले की सेवा पर नई परिभाषा कैसे लागू होगी, यह आपके नियोक्ता की व्याख्या पर निर्भर है। HR से पूछें कि आपकी ग्रेच्युटी का हिसाब कैसे होगा। क्या ग्रेच्युटी पर टैक्स लगता है? ₹20 लाख की टैक्स-फ़्री सीमा 1 अप्रैल 2026 से ग्रेच्युटी की छूट Income-tax Act, 2025 के section 19 के तहत दी गई टेबल में है, जिसने 1961 के Act के section 10(10) की जगह ली। टैक्स का तरीका इस पर निर्भर है कि आपका नियोक्ता कौन है। कर्मचारी का प्रकार टैक्स-फ़्री रकम केंद्र/राज्य सरकार, स्थानीय निकाय पूरी ग्रेच्युटी प्राइवेट, ग्रेच्युटी कानून के दायरे में इनमें से सबसे कम: असल ग्रेच्युटी; कानूनी फ़ॉर्मूले और सीमा (₹20 लाख) के तहत रकम प्राइवेट, दायरे से बाहर इनमें से सबसे कम: असल ग्रेच्युटी; ½ महीने का औसत वेतन × पूरे साल; ₹20 लाख मृत्यु पर नॉमिनी को मिली नॉमिनी के हाथ में सैलरी के रूप में टैक्स नहीं दायरे वाले कर्मचारियों के लिए ₹20 लाख का आंकड़ा मार्च 2018 से लागू है, और 8 मार्च 2019 की अधिसूचना S.O. 1213(E) से इसे दायरे से बाहर वाले कर्मचारियों पर भी बढ़ाया गया, जैसा आयकर विभाग का FAQ पुष्टि करता है। 2025 का Act किसी संख्या के बजाय "अधिसूचित" (notified) रकम की बात करता है, और अक्टूबर 2026 तक प्राइवेट सेक्टर के लिए कोई ऊंचा आंकड़ा अधिसूचित नहीं हुआ था। बार-बार नौकरी बदलने वालों के लिए लाइफ़टाइम सीमा क्यों अहम है ₹20 लाख एक लाइफ़टाइम सीमा है, हर नियोक्ता के लिए अलग नहीं। अगर आपको पिछले नियोक्ता से ₹6 लाख टैक्स-फ़्री मिले थे, तो भविष्य में सिर्फ़ ₹14 लाख और टैक्स-फ़्री हो सकते हैं। पिछली ग्रेच्युटी दिखाने वाले अपने पुराने Form 16 या रिलीविंग दस्तावेज़ संभाल कर रखें। उदाहरण: सीमा से ज़्यादा ग्रेच्युटी सीनियर मैनेजर राजेश को अपनी कंपनी की बढ़ी हुई ग्रेच्युटी पॉलिसी के तहत ₹28 लाख मिलते हैं। ₹20 लाख टैक्स-फ़्री हैं; ₹8 लाख उसकी सैलरी में जुड़ जाते हैं। 30% स्लैब और 4% सेस पर टैक्स लगभग ₹2.5 लाख बनता है। अगर एरियर की वजह से आय असामान्य रूप से बढ़ जाए, तो section 89 की जगह लेने वाले प्रावधानों के तहत राहत मदद कर सकती है; अपने टैक्स सलाहकार से पूछें। क्या न्यू टैक्स रिजीम में ग्रेच्युटी की छूट मिलती है? हां। HRA या section 80C के उलट, ग्रेच्युटी की छूट ओल्ड और न्यू दोनों रिजीम में मिलती है। रिजीम चुनने के बारे में ज़्यादा जानने के लिए हमारी FY 2026-27 की टैक्स प्लानिंग गाइड और "Income-tax Act 2025 ने क्या बदला" पर हमारा लेख देखें। सरकारी कर्मचारियों की सीमा ₹25 लाख क्यों है? यह आंकड़ा भुगतान की ऊपरी सीमा है, टैक्स की सीमा नहीं। Department of Pension and Pensioners' Welfare ने DA के 50% पहुंचने के बाद, 1 जनवरी 2024 से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए अधिकतम रिटायरमेंट और डेथ ग्रेच्युटी ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख कर दी (30 मई 2024 का OM)। उनकी ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ़्री बनी हुई है। प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को ऐसी कोई बढ़ोतरी नहीं मिली। ग्रेच्युटी का क्लेम कैसे करें, और इसमें कितना समय लगता है? Social Security (Central) Rules, 2026 के तहत (यह प्रक्रिया Central Rules के दायरे वाले प्रतिष्ठानों के लिए है; दूसरे प्रतिष्ठानों के लिए संबंधित सरकार के नियम जांचें), ग्रेच्युटी देय होने के बाद आप अपने नियोक्ता को अर्ज़ी देते हैं, आम तौर पर 30 दिन के अंदर। नियोक्ता को 15 दिन के अंदर क्लेम स्वीकार या अस्वीकार करने का नोटिस देना होता है और स्वीकार किए गए क्लेम का भुगतान अर्ज़ी मिलने के 30 दिन के अंदर करना होता है। कानूनी वारिसों को अर्ज़ी देने के लिए एक साल तक का समय मिलता है। अगर नियोक्ता देरी करे या रकम पर विवाद करे, तो आप Code के तहत सक्षम प्राधिकारी (competent authority) के पास जा सकते हैं, और देर से भुगतान पर ब्याज देना होता है। किसी कोर्ट डिक्री से ग्रेच्युटी कुर्क नहीं की जा सकती, और इसे सिर्फ़ गिने-चुने मामलों में ज़ब्त किया जा सकता है, जैसे ऐसे दुर्व्यवहार के लिए बर्ख़ास्तगी जिससे नियोक्ता को नुकसान हुआ हो। अपनी ग्रेच्युटी का इस्तेमाल कैसे करें? ग्रेच्युटी अक्सर बदलाव के समय आती है: नई नौकरी, छंटनी या रिटायरमेंट। इसे खर्च करने का पैसा मानने के बजाय अपने रिटायरमेंट कॉर्पस का हिस्सा मानें। तीन आम इस्तेमाल: दो नौकरियों के बीच: पहले इमरजेंसी फंड भरें; छंटनी के बाद हमारा 90 दिन का मनी प्लान प्राथमिकताओं का क्रम बताता है। रिटायरमेंट पर: इसे EPF और दूसरी बचत के साथ मिलाकर एक आमदनी योजना बनाएं, जैसे SWP (सिस्टमैटिक विदड्रॉल प्लान, यानी तय अंतराल पर तय रकम निकालना) के साथ बकेट स्ट्रैटेजी। करियर के बीच में: इसे सेविंग्स अकाउंट में पड़े रहने देने के बजाय लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए निवेश करें। अगर आप रिटायरमेंट से पांच साल के अंदर हैं, तो हमारी प्री-रिटायरमेंट चेकलिस्ट और रिटायरमेंट कैलकुलेटर दिखाते हैं कि ग्रेच्युटी आपकी आमदनी के दूसरे स्रोतों के साथ कैसे फ़िट होती है। संबंधित लेख 2026 में EPF और VPF: नियम, निकासी और टैक्स EPF कैलकुलेटर: आपका PF और EPS पेंशन कैसे बढ़ते हैं रिटायरमेंट टैक्स प्लानिंग: निकासी की पांच रणनीतियां HRA छूट: इसका हिसाब कैसे होता है भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग: कितना कॉर्पस चाहिए अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न ग्रेच्युटी कैलकुलेशन का फ़ॉर्मूला क्या है? ग्रेच्युटी कानून के दायरे वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी = आख़िरी मिला मासिक वेतन (बेसिक और महंगाई भत्ता) × 15 ÷ 26 × सेवा के पूरे साल। छह महीने से ज़्यादा का आख़िरी अधूरा साल पूरा साल गिना जाता है। उदाहरण के लिए, ₹50,000 × 15 ÷ 26 × 10 साल से लगभग ₹2.88 लाख बनते हैं। प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए कानूनी भुगतान ₹20 लाख पर सीमित है। क्या 1 साल की नौकरी के बाद ग्रेच्युटी मिलती है? सिर्फ़ फ़िक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को। 21 नवंबर 2025 से लागू Code on Social Security के तहत फ़िक्स्ड-टर्म कर्मचारी एक साल बाद अनुपात के हिसाब से पात्र हो जाते हैं। परमानेंट कर्मचारियों को अब भी पांच साल की लगातार सेवा चाहिए, सिवाय उस स्थिति के जब नौकरी मृत्यु या विकलांगता की वजह से ख़त्म हो, तब कोई न्यूनतम सेवा लागू नहीं होती। 2026 में ग्रेच्युटी पर टैक्स-फ़्री सीमा कितनी है? प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी पूरे जीवन में ₹20 लाख तक टैक्स-फ़्री है, फ़ॉर्मूले की सीमाओं के अधीन। सरकारी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ़्री है। यह छूट अब Income-tax Act, 2025 के section 19 में है, और ओल्ड व न्यू दोनों टैक्स रिजीम में लागू है। सीमा से ऊपर की रकम पर आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है। क्या नए लेबर कोड से मेरी ग्रेच्युटी बढ़ेगी? हो सकता है। कोड वेतन की परिभाषा को चौड़ा करते हैं: अगर वेतन से बाहर रखे गए भत्ते आपके कुल वेतन के 50% से ज़्यादा हैं, तो अतिरिक्त हिस्सा वापस जोड़ा जाता है। अगर आपका बेसिक और DA सैलरी का छोटा हिस्सा है, तो आपकी ग्रेच्युटी का आधार बढ़ता है। हमारे उदाहरण में ₹1 लाख की सैलरी और ₹35,000 बेसिक पर दस साल में ग्रेच्युटी लगभग 43% बढ़ जाती है। क्या ₹20 लाख की ग्रेच्युटी सीमा हर नियोक्ता के लिए अलग है? नहीं। ₹20 लाख की टैक्स छूट सभी नियोक्ताओं को मिलाकर एक लाइफ़टाइम सीमा है। पहले जितनी ग्रेच्युटी पर छूट ली गई, उतनी आगे के लिए घट जाती है। अगर आपको एक नियोक्ता से ₹5 लाख टैक्स-फ़्री मिले थे, तो भविष्य की ग्रेच्युटी के लिए बची छूट ₹15 लाख है। अपने रिटर्न के लिए पिछले भुगतानों का रिकॉर्ड रखें। नियोक्ता को ग्रेच्युटी कितने दिन में देनी होती है? Social Security (Central) Rules, 2026 के तहत नियोक्ता को 15 दिन के अंदर क्लेम पर फ़ैसला करना होता है और स्वीकार किए गए क्लेम का भुगतान अर्ज़ी मिलने के 30 दिन के अंदर करना होता है। भुगतान में देरी हो तो ब्याज देना होता है, और आप Code on Social Security के तहत सक्षम प्राधिकारी के पास जा सकते हैं। क्या नॉमिनी को मिली ग्रेच्युटी पर टैक्स लगता है? कर्मचारी की मृत्यु के बाद नॉमिनी या कानूनी वारिस को मिली ग्रेच्युटी पर सैलरी के रूप में टैक्स नहीं लगता, क्योंकि पाने वाला व्यक्ति कर्मचारी नहीं था। कर्मचारी के अपने परिवार के लिए, नियोक्ता के पास वैध नॉमिनेशन जमा करना यह पक्का करने का सबसे आसान तरीका है कि पैसा उन तक जल्दी पहुंचे। नौकरी छोड़ रहे हैं या ग्रेच्युटी के चेक के साथ रिटायर हो रहे हैं? ग्रेच्युटी, EPF और लीव एनकैशमेंट पर अलग-अलग तरह से टैक्स लगता है, और बर्बादी से बचने के लिए इन सबकी एक योजना चाहिए। मुफ़्त पोर्टफ़ोलियो रिव्यू के लिए Money n Wealth से बात करें। अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है, इसे निवेश, टैक्स या बीमा सलाह न मानें। आंकड़े और उदाहरण केवल समझाने के लिए हैं। म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं, योजना से जुड़े सभी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें। Money n Wealth (Predics Fintech Services Pvt Ltd) एक AMFI-registered Mutual Fund Distributor (ARN-121995) और APMI-registered PMS Distributor (APRN07444) है; यह SEBI-registered investment adviser नहीं है और इसके माध्यम से किए गए निवेश पर वितरण कमीशन प्राप्त कर सकता है। बीमा आग्रह की विषय वस्तु है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ग्रेच्युटी कैलकुलेशन का फ़ॉर्मूला क्या है?
ग्रेच्युटी कानून के दायरे वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी = आख़िरी मिला मासिक वेतन (बेसिक और महंगाई भत्ता) × 15 ÷ 26 × सेवा के पूरे साल। छह महीने से ज़्यादा का आख़िरी अधूरा साल पूरा साल गिना जाता है। उदाहरण के लिए, ₹50,000 × 15 ÷ 26 × 10 साल से लगभग ₹2.88 लाख बनते हैं। प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए कानूनी भुगतान ₹20 लाख पर सीमित है।
क्या 1 साल की नौकरी के बाद ग्रेच्युटी मिलती है?
सिर्फ़ फ़िक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को। 21 नवंबर 2025 से लागू Code on Social Security के तहत फ़िक्स्ड-टर्म कर्मचारी एक साल बाद अनुपात के हिसाब से पात्र हो जाते हैं। परमानेंट कर्मचारियों को अब भी पांच साल की लगातार सेवा चाहिए, सिवाय उस स्थिति के जब नौकरी मृत्यु या विकलांगता की वजह से ख़त्म हो, तब कोई न्यूनतम सेवा लागू नहीं होती।
2026 में ग्रेच्युटी पर टैक्स-फ़्री सीमा कितनी है?
प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी पूरे जीवन में ₹20 लाख तक टैक्स-फ़्री है, फ़ॉर्मूले की सीमाओं के अधीन। सरकारी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ़्री है। यह छूट अब Income-tax Act, 2025 के section 19 में है, और ओल्ड व न्यू दोनों टैक्स रिजीम में लागू है। सीमा से ऊपर की रकम पर आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है।
क्या नए लेबर कोड से मेरी ग्रेच्युटी बढ़ेगी?
हो सकता है। कोड वेतन की परिभाषा को चौड़ा करते हैं: अगर वेतन से बाहर रखे गए भत्ते आपके कुल वेतन के 50% से ज़्यादा हैं, तो अतिरिक्त हिस्सा वापस जोड़ा जाता है। अगर आपका बेसिक और DA सैलरी का छोटा हिस्सा है, तो आपकी ग्रेच्युटी का आधार बढ़ता है। हमारे उदाहरण में ₹1 लाख की सैलरी और ₹35,000 बेसिक पर दस साल में ग्रेच्युटी लगभग 43% बढ़ जाती है।
क्या ₹20 लाख की ग्रेच्युटी सीमा हर नियोक्ता के लिए अलग है?
नहीं। ₹20 लाख की टैक्स छूट सभी नियोक्ताओं को मिलाकर एक लाइफ़टाइम सीमा है। पहले जितनी ग्रेच्युटी पर छूट ली गई, उतनी आगे के लिए घट जाती है। अगर आपको एक नियोक्ता से ₹5 लाख टैक्स-फ़्री मिले थे, तो भविष्य की ग्रेच्युटी के लिए बची छूट ₹15 लाख है। अपने रिटर्न के लिए पिछले भुगतानों का रिकॉर्ड रखें।
नियोक्ता को ग्रेच्युटी कितने दिन में देनी होती है?
Social Security (Central) Rules, 2026 के तहत नियोक्ता को 15 दिन के अंदर क्लेम पर फ़ैसला करना होता है और स्वीकार किए गए क्लेम का भुगतान अर्ज़ी मिलने के 30 दिन के अंदर करना होता है। भुगतान में देरी हो तो ब्याज देना होता है, और आप Code on Social Security के तहत सक्षम प्राधिकारी के पास जा सकते हैं।
क्या नॉमिनी को मिली ग्रेच्युटी पर टैक्स लगता है?
कर्मचारी की मृत्यु के बाद नॉमिनी या कानूनी वारिस को मिली ग्रेच्युटी पर सैलरी के रूप में टैक्स नहीं लगता, क्योंकि पाने वाला व्यक्ति कर्मचारी नहीं था। कर्मचारी के अपने परिवार के लिए, नियोक्ता के पास वैध नॉमिनेशन जमा करना यह पक्का करने का सबसे आसान तरीका है कि पैसा उन तक जल्दी पहुंचे।
नौकरी छोड़ रहे हैं या ग्रेच्युटी के चेक के साथ रिटायर हो रहे हैं?
ग्रेच्युटी, EPF और लीव एनकैशमेंट पर अलग-अलग तरह से टैक्स लगता है, और बर्बादी से बचने के लिए इन सबकी एक योजना चाहिए। मुफ़्त पोर्टफ़ोलियो रिव्यू के लिए Money n Wealth से बात करें।